याद आये तो कर लेना याद /लालित्य ललित
याद आये
तो
कर लेना
याद
भूला मत देना
सच्ची रो पड़ूँगा
पता नहीं
कब से तुम से
यह नेह का नाता जुड़ गया
अपना स्वभाव ही ऐसा है
कब
कौन से डगर में
कौन जुड़ जाए
कौन बिछुड़ जाए
पता ही नहीं चलता
अब देखो न
तुम बिछुड़ गई
समय वजूद सब रहेगा
तुम रहोगी
स्मृति में मेरी
हमेशा के लिए
एक मधुर याद
क्या दिन थे वे
अब ज्यादा याद करूंगा
तो रो पडूंगा
सो
अब और नहीं आज
थोड़ा सा एकांत
जो नितांत मेरा है
अपना है
गर याद आये तो
दूर नहीं मैं
कभी भी
यह कोरा आश्वाशन नहीं
सच है
दिल से कहा है
और मैं कभी झूठ नहीं कहता।
याद आये
तो
कर लेना
याद
भूला मत देना
सच्ची रो पड़ूँगा
पता नहीं
कब से तुम से
यह नेह का नाता जुड़ गया
अपना स्वभाव ही ऐसा है
कब
कौन से डगर में
कौन जुड़ जाए
कौन बिछुड़ जाए
पता ही नहीं चलता
अब देखो न
तुम बिछुड़ गई
समय वजूद सब रहेगा
तुम रहोगी
स्मृति में मेरी
हमेशा के लिए
एक मधुर याद
क्या दिन थे वे
अब ज्यादा याद करूंगा
तो रो पडूंगा
सो
अब और नहीं आज
थोड़ा सा एकांत
जो नितांत मेरा है
अपना है
गर याद आये तो
दूर नहीं मैं
कभी भी
यह कोरा आश्वाशन नहीं
सच है
दिल से कहा है
और मैं कभी झूठ नहीं कहता।
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