जिंदगी को समझने का मेरा फ़लसफ़ा /लालित्य ललित
जिंदगी बहुत तेज़ी से
अपने साथ बहा ले जाती है
किस्से ,कहानियाँ अपनापन और तमाम तरह की
मेहरबानियाँ भी
लेकिन एक बात जो मैंने समझी
तुम्हारे साथ
तुम किसी भी हाल में
नहीं बदली
तो नहीं बदली
शायद जिंदगी को समझने का यह तुम्हारा फ़लसफ़ा था
पर मुझ से
बेहद मेच करता है
शायद यही अपने जीवन को समझने का
समन्वय है
सेतु है
और सच भी
जो शायद नहीं बदलेगा
होना भी यही चाहिए
अब तो मैं भी यही चाहता हूँ कि तुम्हारे साथ ही बिताऊं
अपने सब दुःख और सुख
साँझा करूँ वे पल
जो नितांत अपने है ,अपने थे रहेंगे
यह सौ फीसदी सच है
साथ दोगी मेरा
मीलों दूर चलने का
नाराज तो नहीं होगी
नहीं -
यह तुमने कहा
और कहा -आजमा कर देख लो
मैंने कहा -
अब क्या आजमाना
जब कह दिया तो कह दिया
बार -बार एक अपन दोहराते नहीं
गाडी हाइवे पर दौड़ने लगी थीं
और तुमने अपना सर मेरे कंधे पर झूला दिया था
शायद यह ठंडी हवा का असर था
या अपना प्यार फिर से
रिचार्ज था
अब जो भी था
वह अनुपम और लावण्ययुक्त था
जिसको परिभाषित नहीं सकता
न आज
न कभी भी।
जिंदगी बहुत तेज़ी से
अपने साथ बहा ले जाती है
किस्से ,कहानियाँ अपनापन और तमाम तरह की
मेहरबानियाँ भी
लेकिन एक बात जो मैंने समझी
तुम्हारे साथ
तुम किसी भी हाल में
नहीं बदली
तो नहीं बदली
शायद जिंदगी को समझने का यह तुम्हारा फ़लसफ़ा था
पर मुझ से
बेहद मेच करता है
शायद यही अपने जीवन को समझने का
समन्वय है
सेतु है
और सच भी
जो शायद नहीं बदलेगा
होना भी यही चाहिए
अब तो मैं भी यही चाहता हूँ कि तुम्हारे साथ ही बिताऊं
अपने सब दुःख और सुख
साँझा करूँ वे पल
जो नितांत अपने है ,अपने थे रहेंगे
यह सौ फीसदी सच है
साथ दोगी मेरा
मीलों दूर चलने का
नाराज तो नहीं होगी
नहीं -
यह तुमने कहा
और कहा -आजमा कर देख लो
मैंने कहा -
अब क्या आजमाना
जब कह दिया तो कह दिया
बार -बार एक अपन दोहराते नहीं
गाडी हाइवे पर दौड़ने लगी थीं
और तुमने अपना सर मेरे कंधे पर झूला दिया था
शायद यह ठंडी हवा का असर था
या अपना प्यार फिर से
रिचार्ज था
अब जो भी था
वह अनुपम और लावण्ययुक्त था
जिसको परिभाषित नहीं सकता
न आज
न कभी भी।
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