पता सब है /लालित्य ललित
कई बार
कुछ चीजों को
भूल जाने का मन करता है
लेकिन मन है
इतनी आसानी से कहाँ मानता है
और वे
सोचते है कि
यह हमारी जीत है
हमने जो सोचा
शायद हमारा निर्णय ठीक था
मैं कई चीजों पर
हँस देता हूँ
सोचता हूँ शायद यही लिखा था
होने दो
यह मेरी मूर्खता है
या
उनकी चाल
कुछ चीजें हालात पर छोड़ देता हूँ
यह भी वक्त है
एक वह भी ज़माना था
हर पल का
अपना आनंद होता है
इसको भी एक आनंद मान लिया
और शांत होकर
कुछ देर को
आँख मूँद ली।
[17 जुलाई 2015 ]
कई बार
कुछ चीजों को
भूल जाने का मन करता है
लेकिन मन है
इतनी आसानी से कहाँ मानता है
और वे
सोचते है कि
यह हमारी जीत है
हमने जो सोचा
शायद हमारा निर्णय ठीक था
मैं कई चीजों पर
हँस देता हूँ
सोचता हूँ शायद यही लिखा था
होने दो
यह मेरी मूर्खता है
या
उनकी चाल
कुछ चीजें हालात पर छोड़ देता हूँ
यह भी वक्त है
एक वह भी ज़माना था
हर पल का
अपना आनंद होता है
इसको भी एक आनंद मान लिया
और शांत होकर
कुछ देर को
आँख मूँद ली।
[17 जुलाई 2015 ]
No comments:
Post a Comment